शेयर मार्केट में वॉल्यूम क्या होता है? । Full details explained in hindi - pourit

वॉल्यूम इन शेयर मार्केट | वॉल्यूम पैटर्न | वॉल्यूम संख्या क्या है | शेयर मार्केट में वॉल्यूम का मतलब क्या होता है | शेयर मार्केट में वॉल्यूम क्या होता है | वॉल्यूम का फॉर्मूला
 

शेयर मार्केट में वॉल्यूम क्या होता है? । Full details explained in hindi


स्वागत है अपका आज के इस ब्लॉग में जिसमे हम बात करने वाले है ट्रेडिंग वॉल्यूम (Trading Volume) के बारे में। तो ट्रेडिंग वॉल्यूम शेयर मार्केट का एक मुख्य हिस्सा है। ट्रेडिंग वॉल्यूम से हमे काफी चीजे पता चलती है जैसे कि विशेष समय पर कितना ट्रेडिंग हो रहा है जैसे अन्य चीजे पता चलती है।

इसलिए अगर आप शेयर मार्केट में निवेश करते है तो आपके लिए ट्रेडिंग वॉल्यूम या वॉल्यूम की जानकारी होना जरूरी हो जाता है। ट्रेडिंग वॉल्यूम (Volume hindi) के वजह से कोई भी ट्रेडर पता लगा सकता है कि शेयर की कीमत ऊपर जाएगी या नीचे। और ट्रेडर अच्छा खासा मुनाफा कमाते है वॉल्यूम की जानकारी होने के कारण। इसलिए आज के इस ब्लॉग में हम विस्तार से Trading Volume kya hota hai के बारे में बात करेंगे।


    शेयर मार्केट में वॉल्यूम का मतलब क्या होता है (volume meaning in share market)

    शेयर मार्केट में वॉल्यूम क्या होता है? । Full details explained in hindi


    शेयर मार्केट में वॉल्यूम का मतलब होता है, किसी शेयर या स्टॉक में होने वाले खरीदारी और बिक्री की मात्रा। 

    अगर ट्रेड किए गए शेयरों की संख्या ज्यादा होगी तो वॉल्यूम भी ज्यादा होगी। यानी कि अगर शेयर ज्यादा मात्रा में खरीदा और बेचा जाएगा तो वॉल्यूम की मात्रा भी ज्यादा होगी।

    वही अगर मार्केट में मंदी हो या फिर तेजी ऐसे दोनो मामले में शेयर की वॉल्यूम बढ़ती हुई दिखती है। मंदी में वॉल्यूम बढ़ने का यह कारण होता है कि उस समय ज्यादा से ज्यादा लोग स्टॉक को बेचना चाहते है। और तेजी में वॉल्यूम बढ़ने का कारण यह होता है कि ज्यादा से ज्यादा लोग स्टॉक को खरीदना चाहते है। 

    शेयर मार्केट में वॉल्यूम क्या होता है (share market me volume kya hota hai)


    अगर कोई भी शेयर का ट्रेड होता है तो वॉल्यूम का निर्माण होता है। शेयर मार्केट में वॉल्यूम हमे यह बताती है कि किसी कंपनी का शेयर निश्चित समय में कितना बेचा और खरीदा गया है यानी कि जितने शेयर की संख्या का ट्रेड होता है उसे वॉल्यूम खहते है।

    जैसे की मान लीजिए कोई XYZ कंपनी के 5000 शेयर को बेचना चाहता है और कुछ लोग XYZ कंपनी के 5000 शेयर को खरीदना चाहता है तो वहां पर 5000 Volume का निर्माण होता है। क्योंकि यहां पर 5000 शेयर की लेन देन हुई है।

    अगर आपको लगता है कि 5000 शेयर बेचा गया और 5000 शेयर खरीदा गया तो वॉल्यूम 10,000 की बनेगी जोकि गलत है। अगर ट्रेड 1000 का हो रहा है तो वॉल्यूम भी 1000 का ही होगा।


    वॉल्यूम का फॉर्मूला (Volume ka formula)


    वॉल्यूम का फॉर्मूला होता है, Total Number of Share जो निश्चित समय में बेचा और खरीदा गया है।

    1st Trade - मान लीजिए कोई एक व्यक्ति 500 शेयर बेचना चाहता है और एक व्यक्ति वही शेयर के 500 मात्रा को खरीदा चाहता है है तो यह हमारा एक ट्रेड हुआ। और इस ट्रेड में को वॉल्यूम होगा, वो 500 का होगा क्योंकि 500 क्वांटिटी का ट्रेड हुआ है।

    2nd Trade - अब कोई व्यक्ति 200 शेयर खरीदना चाहता है और वही शेयर के 200 मात्रा कोई sell करना चाहता है तो यहां पर 200 का वॉल्यूम बनेगा।

    यानी कि हमारा दोनो मामले में हमारा कुल वॉल्यूम हुआ 500+200=700 का। तो हमारा ट्रेड वॉल्यूम हो जाएगा 700 का क्योंकि यहां पर "Total Number of Share" 700  का ट्रेड हुआ है। और यह प्रक्रिया चलता रहता है मार्केट खुलने से लेकर मार्केट बंद होने तक।

    यहां पर हमने आपको 2 ट्रेड का उदहारण लेकर समझाने की कोसिस किया हु। मगर एक शेयर में सिर्फ 2 ट्रेड नही होता क्योंकि एक शेयर को खरीदने वाले भी बहुत है और बेचने वाले भी बहुत है। 

    इसलिए किसी कंपनी की वॉल्यूम किसी निश्चित समय की देखी जाती है। यानी कि किसी कंपनी में 5 मिनिट में कितना ट्रेड हुआ है फिर 30 मिनिट, 1 दिन, 1 महीने, या फिर 1 साल का ट्रेड वॉल्यूम देखा जाता है।


    वॉल्यूम का क्या काम है


    वॉल्यूम का काम मार्केट के लिक्विडिटी (Liquidity) को बताने का होता है। मार्केट की लिक्विडिटी ज्यादा तभी होती है जब शेयर की वॉल्यूम ज्यादा हो। 

    अब बात आती है कि लिक्विडिटी ज्यादा होना का क्या फायदा है। फायदा यही है कि किसी भी शेयर को आप बेचना चाहते है या फिर खरीदना चाहते है तो आपको आसानी होगी। 

    अगर किसी शेयर की लिक्विडिटी हाई (High) है तो इसका मतलब यह होता है कि उसकी वॉल्यूम ज्यादा होगी। और अगर वॉल्यूम ज्यादा है तो साधारण सी बात है कि उस विशेष शेयर के खरीदार और विक्रेता ज्यादा है। तो आपको उस स्टॉक में ट्रेड करने में आसानी होगी।

    Charts में volume कहां पर दिखता है



    यहां पर आपको Red और Green रंग की कैंडल दिखाई गई है जोकि वॉल्यूम है। Green candle स्ट्रॉन्ग buying वॉल्यूम दिखाता है Red candle selling वॉल्यूम दिखाता है। 

    हमारे द्वारा 1 minute Time - period candle दिखाई गई है। अलग - अलग Time - period में अलग-अलग वॉल्यूम बनते है। 

    निष्कर्ष


    तो दोस्तों आज हमने जाना शेयर मार्केट में वॉल्यूम क्या होता है। अगर आपको कुछ और इनफॉर्मेशन चाहिए तो आप कॉमेंट कर के पूछ सकते है। और अगर आपको कुछ लगता है की पोस्ट में और भी कुछ इनफॉर्मेशन डालनी चाहिए तो आप कॉमेंट कर के बता सकते है।

    प्रश्न. ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होने पर इसका क्या मतलब है?


    उत्तर - ट्रेडिंग का वॉल्यूम ट्रेड किए गए शेयरों की संख्या बताता है वही ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होने का मतलब यह हो सकता है कि उस विशेष स्टॉक में लोगों की रुचि न होना। जिसके वजह से स्टॉक्स में अगर डाउंट्रेड का वॉल्यूम कम है तो शेयर "Bullish" का संकेत देता है और अगर अपट्रेड का वॉल्यूम कम होता है तो यह "Bearish" का संकेत देता है।

    प्रश्न. स्टॉक मार्केट में स्टॉक का वॉल्यूम कैसे बनता है?


    उत्तर  - स्टॉक मार्केट में स्टॉक का वॉल्यूम शेयर के ट्रेड होने से बनता है। अगर असान भासा में समझे तो जितने भी buy और sell किसी विशेष शेयर में होती है तो स्टॉक का वॉल्यूम बनता है।

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